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LPG गैस की भारी कमी: मध्य पूर्व संघर्ष ने नुकसान पहुंचाया

के द्वारा प्रकाशित किया गया Aashish Malethia    पर 27 मार्च 2026    टिप्पणि(20)
LPG गैस की भारी कमी: मध्य पूर्व संघर्ष ने नुकसान पहुंचाया

अक्सर सुबह को रसोई में ही पता चलता है कि गैस सिलेंडर खत्म हो गया है। लेकिन अब यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है। देश भर में घरेलू उपयोग के लिए LPG गैस की भारी कमी देखने को मिल रही है, जिससे आम लोग परेशान हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक इस समस्या ने कई राज्यों को झकझोर दिया है। सबसे बड़ा कारण? मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने आयात प्रक्रिया को ठप कर दिया है। लोग अब एजेंसियों के पास नहीं जा रहे हैं, वे सीधे गोदामों में उमड़ पड़े हैं।

भूमिगत आपदा: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र प्रभावित

सच्चाई यह है कि यह कोई छोटी बात नहीं है। मेदिनीनगर, झारखंड में हालात बेहद गंदा हो गए हैं। लोग OTP मिलते ही एजेंसी की तरफ भाग पड़ते हैं। एक साधारण नागरिक राहुल कुमार के अनुसार, उन्हें e-KYC की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। वो बार-बार एजेंसी चक्कर लगाते रहे। ऐसे ही दृश्य लखनऊ और करौली (राजस्थान) में भी देखे गए। दोपहर की तेज धूप में लोगों ने घंटों लाइन लगाई। कुछ लोग तो थक हार कर बिना सिलेंडर के वापस लौट गए। इसकी मुख्य वही वजह बनी जो हम सभी जानते हैं—पेट्रोलियम कंपनियां। जब नया स्टॉक नहीं भेजा जाता, तो एजेंसी वाले दरवाजे बंद रखते हैं। रायबरेली जैसे जिले में, जहाँ लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, हजारों उपभोक्ताओं ने अपनी बारी का इंतज़ार किया, वहां भी खाली हाथ ही लौटना पड़ा।

मध्य पूर्व का असर और आपूर्ति श्रृंखला

तो पीछे क्या है? कहानी जटिल है। मध्य पूर्व का संघर्ष ने सीधे तौर पर भारतीय रसोई को प्रभावित किया है। जब भी वहां की स्थिति खराब होती है, तो गैस टैंकर समुद्र में रुक जाते हैं। परिणाम? इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और अन्य कंपनियों के गोदाम खाली हो गए हैं। आंकड़े देखिए तो समझ आएगा। अब एक Ujjwala योजना के लाभार्थी को सिलेंडर मिलने में 45 दिन लग रहे हैं। अगर आपके पास दो सिलेंडर का कनेक्शन है, तो वहां 35 दिन का इंतज़ार है। सिर्फ एक सिलेंडर होने पर भी समय 25 दिन है। ये नंबर पहले कभी इतने नहीं थे। एक बार यह श्रेणी बढ़ती है, तो घर में रसोई बनती है पुराने जमाने वाली—लकड़ी या कोयले पर।

एजेंसी मालिकों की व्यथा

एजेंसी मालिकों की व्यथा

गर्मी की मशक्कत केवल उपभोक्ताओं की नहीं, एजेंसी ऑपरेटरों की भी है। मजार अलम, महि भारत गैस एजेंसी के ऑपरेटर, बताते हैं कि मांग बहुत ज्यादा है। उनका कहना है कि उन्हें रोज़ाना मात्र 525 सिलेंडर मिल रहे हैं, जो पूरा नहीं होते। उन्होंने कहा, "हम भी चाहते हैं कि सबको गैस मिले, लेकिन ऊपर से स्टॉक नहीं आ रहा।" इंदान गैस एजेंसी के स्टाफ की भी यही बात है। टिका राम मैना, जो करौली में काम करते हैं, बताते हैं कि सर्वर की गड़बड़ी ने स्थिति और खराब कर दी है। लोगों को बुकिंग करने के लिए OTP नहीं मिल रहा। वे मजबूर हैं कि हाथों से नंबर दर्ज करें, जिसे मैन्युअल रजिस्ट्रेशन कहते हैं। यह पुराने तरीके से काम करने का जुर्म है।

सरकारी पहल और तकनीकी गड़बड़ी

सरकारी पहल और तकनीकी गड़बड़ी

प्रशासन ने इसे अनदेखा नहीं किया। रायबरेली जिला प्रशासन ने 56 एजेंसियों में कुल 112 नए काउंटर खोले हैं ताकि e-KYC और बुकिंग आसान हो जाए। फिर भी, डीहा ब्लॉक में इंदान गैस वालों को स्टॉक ही नहीं मिला। सुबह से लाइन लगाने वाले लोग शाम तक बैठे रह गए। तकनीकी रूप से भी समस्या है। ऑनलाइन पोर्टल पर सर्वर ढीला पड़ गया है। जब लाखों लोग एक साथ अप्लाई करते हैं, तो सिस्टम क्रैश हो जाता है। इससे OTP देर से आता है और बुकिंग फेल हो जाती है। कंपनी ने इसे माना है कि डिलीवरी में 8 से 10 दिन का अंतर आ गया है। एक एजेंसी पर 1,500 लगे बचे आवेदन हैं।

Frequently Asked Questions

गैस की कमी का मुख्य कारण क्या है?

मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों का आयात बाधित हुआ है। इसके अलावा, ऑनलाइन सर्वर की गड़बड़ी और e-KYC की समस्या भी कन्फ्यूजन बढ़ा रही है।

गैस सिलेंडर मिलने में कितना समय लग रहा है?

हकदारों के लिए समय बढ़ गया है। Ujjwala योजना के लिए 45 दिन, दो सिलेंडर वाले 35 दिन और एक सिलेंडर वाले ग्राहकों के लिए 25 दिन का इंतज़ार करना पड़ रहा है।

क्या एजेंसियां खुल रही हैं?

रायबरेली जैसी जगहों पर प्रशासन ने 112 नए काउंटर खोले हैं। लेकिन जब स्टॉक खत्म होता है, तो गोदाम लॉक हो जाते हैं और लोग वहीं खींच लेते हैं।

OTA नहीं मिलने पर क्या करें?

अगर ऑनलाइन OTP नहीं मिल रहा है, तो एजेंसी ऑपरेटर से मैन्युअल नंबर रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए। कर्मचारियों ने बताया है कि टेक्निकल दिक्कत का यह हल अभी लागू है।

20 टिप्पणि

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    saravanan saran

    मार्च 28, 2026 AT 22:50

    यह स्थिति भूलभूली से नहीं आई है। मध्य पूर्व की वजह से पूरी वैश्विक श्रृंखला पर असर पड़ा है। हमारे देश की रसोई सीधे इससे जुड़ी हुई थी। अब देखिए तो लोग कैसे संभल रहे हैं। गैस नहीं तो चूल्हा लगा दिया जाए। यह बापु जी के समय का माहौल फिर से आ गया।

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    SAURABH PATHAK

    मार्च 29, 2026 AT 14:13

    आंकड़े बताते हैं कि स्टॉक वास्तव में खत्म हो चुका है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 15 प्रतिशत गिरावट आई है। जो लोग सोच रहे हैं कि यह अटकलबाजी है, वो भूल कर रहे हैं।

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    Sharath Narla

    मार्च 30, 2026 AT 11:06

    45 दिन का इंतज़ार? मतलब हम अगले साल तक रसोई का काम छोड़ देंगे। सरकारी योजनाएं नाम के लिए हैं। पहले सिलेंडर खुद खरीदने दो। फिर ये बर्बादी होती है। हा हा!

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    Robin Godden

    मार्च 31, 2026 AT 03:05

    दोस्तों, निराशा मत हों। ऐसी मुसीबत हर किसी का साथ जाती है। हम सब को एक साथ मिलकर यह समय निकालना होगा।

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    Raman Deep

    अप्रैल 1, 2026 AT 15:07

    भाई यार क्या हुआ 😭😭 OTP का दर्द और लाइनों में खड़े होना। बहुत कष्ट हो रहा है 🥺🥺 सच में पेट्रोलियम वालों पर नाराज हूँ 💔💔

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    Priyank Prakash

    अप्रैल 1, 2026 AT 21:17

    अरे भाई साहब! यह तो बड़ी दुर्घटना है। मेरे घर में सब रो रहे हैं। रसोई बन गई है नौबती। अगर इस पर कोई ठीक नहीं होगा तो सब जा जाएगा।

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    shrishti bharuka

    अप्रैल 3, 2026 AT 15:59

    सरकारी स्तर पर जोड़तोड़ हो रही है। लेकिन आम आदमी के लिए यह बहुत भारी बोझ बन गया है। उज्ज्वला का लाभार्थी सबसे ज्यादा प्रभावित है। उसे 45 दिन इंतज़ार करना पड़ रहा है। यह बेहद दुखद स्थिति है।

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    Senthilkumar Vedagiri

    अप्रैल 4, 2026 AT 16:52

    मेरा मानना है कि यह कोई षड्यंत्र है। गैस कंपनी ही जानबूझकर लाइन बंद करवा रही है। वे लोग अपना कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। हम सिर्फ गुलाम हैं।

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    Jivika Mahal

    अप्रैल 6, 2026 AT 00:58

    यह सोचना गलत है। अभी सरकार बहुत कोशिश कर रही है। आपको उम्मीद बरतनी चाहिए।

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    Kartik Shetty

    अप्रैल 6, 2026 AT 06:44

    विदेशी नीति में ही गड़बड़ है। जब तक मध्य पूर्व शांत नहीं होगा भारतीय गैस टैंकरों को रुकना पड़ेगा। यह भू-राजनीति का खेल है। हमें समझना चाहिए।

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    Anu Taneja

    अप्रैल 7, 2026 AT 18:16

    मेरे गाँव में लोग कोयले का सहारा ले रहे हैं। यह स्वास्थ्य के लिए बहुत बुरा है।

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    vipul gangwar

    अप्रैल 7, 2026 AT 20:28

    हाँ, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है। शहर में भी थोड़ा सुधार है। लेकिन लोग दोनों जगह परेशान हैं।

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    Mayank Rehani

    अप्रैल 7, 2026 AT 22:41

    एजेंसी मालिकों का दबाव बड़ा है। वे भी स्टॉक नहीं पा रहे हैं। डिलीवरी चेन बिल्कुल बंद है।

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    Anirban Das

    अप्रैल 8, 2026 AT 06:02

    ये तो पूरा बंद हो गया है 😒

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    Anamika Goyal

    अप्रैल 9, 2026 AT 20:28

    मुझे भी यह बहुत चिंता की बात लगती है। कई बार मैंने देखा कि लोग मजबूरी में बिना गैस के घर लौटते हैं। उनकी मेहनत बेकार जाती है। धूप में खड़े रहना किसी की हिम्मत में नहीं।

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    Prathamesh Shrikhande

    अप्रैल 10, 2026 AT 06:09

    हाँ सच कह रही हो। 😢

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    Arun Prasath

    अप्रैल 11, 2026 AT 13:02

    तकनीकी समस्या भी बड़ी है। सर्वर क्रैश होते हैं। इसे ठीक करने की जरूरत है।

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    Priya Menon

    अप्रैल 12, 2026 AT 08:31

    प्रशासन ने काउंटर खोले हैं। फिर भी काम नहीं हो रहा। अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जो एजेंसी नहीं चला रही उन्हें बंद किया जाना चाहिए। जनता का हक है।

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    Nikita Roy

    अप्रैल 13, 2026 AT 01:36

    बिल्कुल सही कह रही हो। सरकार को सख्त होना चाहिए।

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    ANISHA SRINIVAS

    अप्रैल 13, 2026 AT 12:49

    वास्तव में यह स्थिति बहुत कठिन है।
    हर घर में रसोई का माहौल खराब हो गया है।
    हम सबको एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।
    मैंने देखा कि पड़ोसी के यहां लकड़ी जलाकर काम चल रहा है।
    यह समय सब्र और सहयोग का मांगता है।
    एजेंसियों पर भी दबाव कम करने की जरूरत है।
    सरकार ने नए काउंटर खोलने की बात की है।
    हमें ऑनलाइन बुकिंग का सही इस्तेमाल करना चाहिए।
    सुबह ठीक समय पर जाना फायदेमंद रहता है।
    धूप में खड़े होने से स्वास्थ्य को नुकसान होता है।
    इसलिए अपने आप को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
    मेडिकल समस्याओं वाले लोगों को प्राथमिकता देने चाहिए।
    समाज सेवा के तहत कुछ लोग सिलेंडर शेयर कर रहे हैं।
    यह बुरे समय में अच्छे कदम उठाए जाने का संकेत है।
    आशा है कि शीघ्र ही आयात प्रक्रिया सामान्य होगी।
    हम सब मिलकर इस मुश्किल को देखेंगे।