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बायर्न म्यूनिख ने विन्सेंट कम्पनी की कोचिंग में जीता 34वां बुंडेसलीगा खिताब, हैरी केन को पहली बड़ी ट्रॉफी

के द्वारा प्रकाशित किया गया Aashish Malethia    पर 19 जुल॰ 2025    टिप्पणि(19)
बायर्न म्यूनिख ने विन्सेंट कम्पनी की कोचिंग में जीता 34वां बुंडेसलीगा खिताब, हैरी केन को पहली बड़ी ट्रॉफी

बायर्न म्यूनिख की दमदार वापसी और नया रिकॉर्ड

जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख ने इस सीजन में एक बार फिर अपने दबदबे का सबको लोहा मनवा दिया है। विन्सेंट कम्पनी की कोचिंग में टीम ने 34वां बुंडेसलीगा खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। खास बात यह है कि यह उनका 1963 के बाद 33वां खिताब है, यानी बायर्न ने आधुनिक बुंडेसलीगा युग में लगभग हर दशक में ट्रॉफी जोड़ी है। पिछले साल बायर्न को खिताब से हाथ धोना पड़ा था, लेकिन इस बार उन्होंने लीग में शुरुआत से ही लीड पकड़ ली और तीसरे हफ्ते के बाद से पोजिशन नहीं गंवाई।

सीजन के 32 मैचों में बायर्न ने 23 जीत दर्ज की, सिर्फ दो मैच हारे और सात मुकाबले ड्रॉ रहे। इस दौरान टीम ने अविश्वसनीय 93 गोल किए—जो इस साल की लीग में सबसे ज्यादा हैं। टीम की अटैकिंग ताकत को देख हर कोई दंग रह गया। बार-बार गोल करने वाली इस टीम के खिलाफ विपक्षी डिफेंस लगभग बेबस नजर आया। बायर लेवरकुजन के फ्रायबर्ग के खिलाफ 2-2 की बराबरी पर रुकने के बाद ही बायर्न ने खिताब पक्का कर लिया था।

विन्सेंट कम्पनी और हैरी केन का नया मुकाम

कभी मैनचेस्टर सिटी के कप्तान रहे विन्सेंट कम्पनी के लिए भी यह सीजन बेहद खास बन गया। इन्होने बर्नले को इंग्लिश चैंपियनशिप में टाइटल जीताया था, अब पहली बार जर्मन शीर्ष क्लब को भी खिताब दिला दिया। कम्पनी की कोचिंग रणनीति और युवा खिलाड़ियों पर भरोसा टीम के लिए गेमचेंजर साबित हुआ।

इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन के लिए भी यह सीजन यादगार रहेगा। टोटेनहैम में शानदार व्यक्तिगत प्रदर्शन के बावजूद उनके हाथ हमेशा मेजर ट्रॉफी से खाली रहे थे। बायर्न के साथ पहला ही साल था और उन्होंने सीधे पहली बड़ी ट्रॉफी जीत ली। केन का अटैक में योगदान, उनकी फिनिशिंग और दवाब में खेलने की क्षमता ने टीम को निर्णायक क्षणों में मजबूती दी। फैंस के लिए यह देखना दिलचस्प रहा—जिस खिलाड़ी को 'ट्रॉफीलेस' कहा जाता था, वही अब जर्मन तलवार के साथ सेलिब्रेट कर रहा है।

टीम के एक और दिग्गज थॉमस मिलर ने भी इस साल 500वां बुंडेसलीगा मैच खेला और 13वीं बार टाइटल जीता। माना जा रहा है कि क्लब वर्ल्ड कप के बाद वे क्लब से विदाई ले सकते हैं।

अब क्लब आगामी सप्ताह में म्यूनिख में बोरुसिया मोनचेनग्लाडबाख के खिलाफ मैदान में उतरकर खिताब का जश्न मनाएगा। उसके बाद अंतिम मैच हॉफनहाइम से 17 मई को खेला जाएगा। इस सीजन ने साबित कर दिया कि बायर्न म्यूनिख का जर्मनी में दबदबा अभी भी कायम है।

19 टिप्पणि

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    Siddhesh Salgaonkar

    जुलाई 19, 2025 AT 19:01
    ये बायर्न वाले तो अब फुटबॉल का बाइबल बन गए 😤👑 जर्मनी में तो ये लोग देवता हैं... बस एक बार भी गलती कर दो तो सब रो पड़ते हैं 🤡
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    Arjun Singh

    जुलाई 21, 2025 AT 10:24
    कम्पनी की टैक्टिक्स इतनी फिट है कि लगता है जैसे एआई ने डिज़ाइन किया हो। जर्मन फुटबॉल की बेसिक्स को बिल्कुल नया ट्विस्ट दिया है। बस एक बात-केन का फिनिशिंग अब एक एथलेटिक एक्सप्रेशन है, न कि सिर्फ गोल।
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    yash killer

    जुलाई 22, 2025 AT 18:05
    भारत के लोग अभी तक फुटबॉल नहीं खेल पाते और ये लोग 34वां टाइटल जीत रहे हैं यार... हमारी लीग में तो खिलाड़ी गाड़ी चलाते हैं और टीम का नाम बदल देते हैं
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    Ankit khare

    जुलाई 23, 2025 AT 00:51
    हैरी केन को ट्रॉफीलेस कहना अब बेकार है भाई... ये आदमी अब जर्मन फुटबॉल का राजा है। टोटेनहैम वाले ने उसे फेंक दिया और बायर्न ने उसे सम्राट बना दिया। ये ही है एक्सप्लॉइटेशन ऑफ टैलेंट। अब बस ये देखना है कि क्या वो बायर्न के लिए 5 साल खेलेगा या फिर पारिस से बर्गर खाने चला जाएगा 😏
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    Chirag Yadav

    जुलाई 24, 2025 AT 04:31
    बहुत अच्छा हुआ कि केन ने अपनी ट्रॉफी की भूख बुझाई। अब वो खुश होंगे। बायर्न के लिए ये सिर्फ टाइटल नहीं, बल्कि एक नया नेक्स्ट लेवल है। जर्मनी में ये लोग अपनी जीत को शेयर करते हैं, वो भी सबके साथ।
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    Shakti Fast

    जुलाई 26, 2025 AT 02:32
    केन के लिए ये बहुत खास है... उन्होंने इतनी मेहनत की, इतना धैर्य रखा। अब उन्हें जो ट्रॉफी मिली है, वो उनके लिए सिर्फ धातु नहीं, बल्कि एक आत्मसमर्पण है। बहुत बधाई 🙌
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    saurabh vishwakarma

    जुलाई 27, 2025 AT 04:34
    इतिहास के इस युग में, जब बायर्न म्यूनिख ने अपने 34वें खिताब को अपने नाम किया, तो यह एक ऐसा अवसर था जिसे केवल वही समझ सकते हैं जिन्होंने अपने जीवन में एक ऐसा विश्वास बनाया है जो टूटने के बाद भी जीवित रहता है। यह एक धार्मिक अनुभव है।
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    MANJUNATH JOGI

    जुलाई 27, 2025 AT 23:25
    भारतीय फैंस के लिए ये देखना बहुत अच्छा है कि एक अंग्रेज कप्तान जर्मन टीम में जीत लाया। ये दुनिया का असली फुटबॉल है-जहां रंग, भाषा, देश नहीं बल्कि टैलेंट बात करता है। बायर्न की टीम एक यूनिवर्सल लैंग्वेज है।
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    Sharad Karande

    जुलाई 28, 2025 AT 16:27
    कम्पनी की ट्रांसफर पॉलिसी और युवा खिलाड़ियों के प्रति उनकी भरोसा एक व्यवस्थित फुटबॉल फिलॉसफी का प्रतीक है। उन्होंने टीम को एक ऑपरेशनल सिस्टम में बदल दिया है-जहां हर खिलाड़ी एक सेंसर की तरह काम करता है। ये नहीं कि वो जीत रहे हैं, बल्कि वो गेम को री-डिज़ाइन कर रहे हैं।
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    Sagar Jadav

    जुलाई 30, 2025 AT 12:07
    केन को ट्रॉफी नहीं मिली थी इसलिए वो अच्छा नहीं था। अब मिल गई तो वो बेहतर हो गया। बस इतना ही।
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    Dr. Dhanada Kulkarni

    जुलाई 30, 2025 AT 16:29
    हैरी केन की जीत का यह पल न केवल एक खिलाड़ी के लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए लंबे समय तक लड़ रहा है। धैर्य और अनुशासन की जीत है यह।
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    Rishabh Sood

    जुलाई 31, 2025 AT 18:51
    इस जीत के पीछे एक अध्यात्मिक सत्य छिपा है-कि जो व्यक्ति अपने अंदर के बोझ को त्याग देता है, वही बाहर के बोझ को उठा सकता है। केन ने अपने अतीत को छोड़ दिया... और जर्मनी ने उसे नए जीवन का वरदान दिया।
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    Saurabh Singh

    जुलाई 31, 2025 AT 22:17
    बायर्न के लिए ये ट्रॉफी बहुत आसानी से आ गई। उन्होंने कोई नई रणनीति नहीं बनाई, बस अपने खिलाड़ियों को बार-बार बाहर भेज दिया। और केन ने बस गोल कर दिया। ये फुटबॉल नहीं, ये एक टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग है।
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    Mali Currington

    अगस्त 2, 2025 AT 21:47
    34वां खिताब? वाह। अब बस ये देखो कि अगले साल भी वो जीतेंगे या फिर बर्नले के बाद उन्हें भी एक बार गिरना पड़ेगा। जब तक तुम खेल रहे हो, तब तक तुम गिर सकते हो।
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    INDRA MUMBA

    अगस्त 4, 2025 AT 10:12
    मैंने जब पहली बार बायर्न का मैच देखा तो लगा जैसे कोई बैलेट चल रहा हो। आज भी वही लगता है। केन का गोल, मिलर का रिकॉर्ड, कम्पनी का शांत नेतृत्व-ये सब एक एक्सप्रेशनिस्ट पेंटिंग की तरह है। असली कला है ये।
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    Anand Bhardwaj

    अगस्त 4, 2025 AT 13:31
    34 टाइटल... और हम अभी तक फुटबॉल फेडरेशन के लिए लोगो बनवाने में भी टाइम नहीं निकाल पाते। बस एक बार देखो कि जर्मनी में युवा खिलाड़ियों को कैसे पाला जाता है। हमारे लिए तो ये सब एक फेंकी हुई फिल्म है।
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    RAJIV PATHAK

    अगस्त 5, 2025 AT 23:20
    34वां खिताब। शानदार। लेकिन अब ये सब एक निर्माण है। एक ब्रांड। एक बाजार। और केन? बस एक उत्पाद।
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    Nalini Singh

    अगस्त 7, 2025 AT 10:09
    बायर्न म्यूनिख की यह उपलब्धि फुटबॉल के इतिहास में एक अद्वितीय घटना है, जिसकी तुलना केवल एक अत्यंत व्यवस्थित, दीर्घकालिक और निरंतर विकास के आधार पर संभव है।
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    Sonia Renthlei

    अगस्त 9, 2025 AT 04:18
    मुझे लगता है कि इस जीत का असली अर्थ ये नहीं है कि बायर्न ने 34वां टाइटल जीता, बल्कि ये है कि एक खिलाड़ी जिसे लोग असफल कहते थे, उसने अपने दिल की आवाज़ सुनी और अपने जीवन को बदल दिया। ये देखकर लगता है जैसे एक बच्चा जो लंबे समय तक डर रहा था, अचानक बोल उठा-'मैं तुम्हें प्यार करता हूँ'। ये जीत दिल की है।