असदुद्दीन ओवैसी के 'जय फिलिस्तीन' टिप्पणी पर विवाद
18वीं लोकसभा के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने 'जय फिलिस्तीन' के नारे के साथ एक बड़ा विवाद खड़ा किया। यह विवाद उस समय उभर कर आया जब उन्होंने अपनी शपथ के बाद 'जय फिलिस्तीन' का उद्घोष किया, जिसे कई सांसदों और राजनीतिक विश्लेषकों ने विदेशी राज्य के प्रति सहानुभूति के रूप में देखा। इस विवाद ने भारतीय राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया।
शिकायतें और कानूनी दांवपेंच
ओवैसी के बयान के तुरंत बाद, वकील हरी शंकर जैन और सामाजिक कार्यकर्ता विनीता जिंदल ने उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज की। हरी शंकर जैन ने अपनी शिकायत में कहा कि ओवैसी ने विदेशी राज्य के प्रति निष्ठा दिखाकर भारतीय संविधान का उल्लंघन किया है। इसी प्रकार, विनीता जिंदल ने अनुच्छेद 103 का हवाला देते हुए ओवैसी की अयोग्यता की मांग की।
अनुच्छेद 103 और विवाद की संवैधानिकता
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 103 सांसदों की अयोग्यता पर विचार करता है। यह विवाद तब प्रारंभ हुआ जब विनीता जिंदल ने इस अनुच्छेद का उपयोग करते हुए ओवैसी को सांसद के पद से अयोग्य ठहराने की अपील की। उनकी दलील थी कि ओवैसी के इस बयान ने उनकी भारतीय संविधान और संसद के प्रति निष्ठा को सवालों के घेरे में ला दिया है।
ओवैसी का पक्ष और महात्मा गांधी का हवाला
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने केवल उनके विचार और समर्थन को प्रस्तुत किया है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का हवाला दिया जो फिलिस्तीन के मुद्दे पर सहानुभूति रखते थे। ओवैसी ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल उत्पीड़ित लोगों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करना था और इसमें किसी प्रकार की विदेशी निष्ठा का सवाल नहीं उठता है।
संसदीय कार्यवाही और किरेन रिजिजू का पदक्षेप
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ओवैसी की टिप्पणी पर प्राप्त शिकायतों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद के रेकॉर्ड से इस टिप्पणी को हटाने का निर्णय लिया गया है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि संसद में ऐसे किसी भी बयान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जो संविधान या भारतीय संप्रभुता के खिलाफ हो।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और भविष्य की चुनौतियाँ
इस विवाद ने भारतीय राजनीति में कई प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। कुछ लोग ओवैसी के समर्थन में आए हैं, तो कुछ ने उनकी आलोचना की है। यह विवाद यह भी दर्शाता है कि आपसी वैचारिक मतभेद भारतीय राजनीति में न केवल चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं, बल्कि यह भी नए विवादों को जन्म दे सकते हैं।
यह विवाद आगे चलकर भारतीय राजनीति में कितनी दूर जाएगा यह देखना बाकी है, लेकिन यह साफ है कि असदुद्दीन ओवैसी के 'जय फिलिस्तीन' टिप्पणी ने भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है।
Saurabh Singh
जून 26, 2024 AT 23:40INDRA MUMBA
जून 27, 2024 AT 18:38Mali Currington
जून 29, 2024 AT 13:11Anand Bhardwaj
जून 30, 2024 AT 21:29Nalini Singh
जुलाई 1, 2024 AT 06:36Sonia Renthlei
जुलाई 2, 2024 AT 09:50Rishabh Sood
जुलाई 3, 2024 AT 08:35Aryan Sharma
जुलाई 4, 2024 AT 03:35Devendra Singh
जुलाई 4, 2024 AT 20:24Siddhesh Salgaonkar
जुलाई 5, 2024 AT 00:08Roshini Kumar
जुलाई 6, 2024 AT 04:11UMESH DEVADIGA
जुलाई 6, 2024 AT 12:51RAJIV PATHAK
जुलाई 7, 2024 AT 20:55